आदिवासी समुदायों पर बढ़ता ऋण समस्या एक गंभीर मामला है। कई बस्तियों में, भूमि पर निर्भर रहने वाले लोग, साहूकारों और अनौपचारिक ऋणदाताओं से अत्यधिक ब्याज दरों पर ऋण लेने के लिए मजबूर हैं। यह अक्सर उनकी जमीनों के गुम होने का कारण बनता है, जिससे वे गरीबी और बेरोजगारी के दुष्चक्र में फंस जाते हैं। सरकार औ